हनुमान जी ने पंचमुखी अवतार क्यों लिया, पौराणिक कथा | पंचमुखी हनुमान के पाँच मुख कौन से है, पूजा के लाभ

शंकर जी के अंशावतार हनुमान जी मार्गशीर्ष (अगहन) मास की कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को, पुष्प नक्षत्र में, सिंह लग्न, तथा मंगल के दिन पंचमुखी हनुमान जी ने अवतार धारण किया। हनुमान जी का यह स्वरूप सभी प्रकार की सिद्धियों को देने वाला है। तो आइए जानते हैं हनुमान जी ने क्यों धारण किया पंचमुखी अवतार और इनकी पूजा के लाभ। 

हनुमान जी के पंचमुखी अवतार का कारण

श्री राम और रावण के युद्ध में जब मेघनाद की मृत्यु हो गई तब रावण धैर्य न रख सका और अपनी विजय के उपाय सोचने लगा तब उसे अपने सहयोगी और पाताल के राक्षस राज अहिरावण की याद आई। जो मां भवानी का परम भक्त होने के साथ-साथ तंत्र मंत्र का भी ज्ञाता था। 

रावण सीधे देवी मंदिर में जा कर पूजा में तल्लीन हो गया उसकी आराधना से अकृष्ट होकर अहिरावण वहां पहुंचा तो रावण ने उससे कहा तुम किसी तरह राम और लक्ष्मण को अपनी पुरी में ले आओ और वहां उनका वध कर डालो फिर यह वानर, भालू तो अपने आप ही भाग जाएंगे। 

रात्रि के समय जब श्री राम की सेना सयन कर रही थी तब हनुमान जी ने अपनी पूछ बढ़ाकर चारों ओर से सब को घेर लिया।

हनुमान जी ने पंचमुखी अवतार क्यों लिया, पौराणिक कथा | Significance of Panchmukhi Hanuman Puja

अहिरावण विभीषण का भेष बनाकर अंदर प्रवेश कर गया। अहिरावण ने सोते हुए अनंत सौदर्य के सागर श्री राम लक्ष्मण को देखा तो देखता ही रह गया। उसने अपनी माया के दम पर भगवान राम की सारी सेना को निद्रा में डाल दिया तथा राम एवं लक्ष्मण का अपहरण कर उन्हें पाताल लोक ले कर आया। 

आकाश में तीव्र प्रकाश से सारी वानर सेना जाग गई विभीषण ने यह पहचान लिया कि यह कार्य अहिरावण का है और उन्होंने हनुमान जी को श्री राम और लक्ष्मण की सहायता करने के लिए पाताल लोक जाने को कहां। 

हनुमान जी पाताल लोक की पूरी जानकारी प्राप्त कर पाताल लोक पहुंचे। पाताल लोक के द्वार पर उन्हें उनका पुत्र मकरध्वज मिला हनुमान जी ने आश्चर्यचकित होकर कहा हनुमान तो बाल ब्रह्मचारी है तुम उसके पुत्र कैसे?

मकरध्वज ने कहा कि जब लंका दहन के बाद जब आप समुद्र में पूँछ बुझाकर स्नान कर रहे थे। तब श्रम के कारण आपके शरीर से पसीना झड़ रहा था जिसे एक मछली ने पी लिया। वह मछली पकड़ कर जब अहिरावण की रसोई में लाई गई और उसे काटा गया तो मेरा जन्म हुआ। अहिरावण ने ही मेरा पालन-पोषण किया इसीलिए मैं उसके नगर की रक्षा करता हूं।

हनुमान जी का मकरध्वज से बाहु युद्ध हुआ और वे उसे बाध कर देवी मंदिर पहुंचे जहां श्री राम और लक्ष्मण की बलि दी जानी थी। 
 
हनुमान जी के आग्रह पर देवी अदृश्य हो गई और उनकी जगह स्वयं रामदूत देवी के रूप में खड़े हो गए। 
 
उसी समय श्री राम ने लक्ष्मण से कहा आपत्ति के समय सभी प्राणी मेरा स्मरण करते हैं किंतु मेरी आपदाओं को दूर करने वाले तो केवल पवन कुमार ही हैं अतः हम उन्ही का स्मरण  करे। लक्ष्मण जी ने कहाँ यहाँ हनुमान कहा। श्री राम ने कहाँ पवन पुत्र कहां नहीं है वो तो पृथ्वी के कण-कण में विद्यमान है मुझे तो देवी रूप में भी उन्ही के दर्शन हो रहे हैं। 
 
हनुमान जी ने वहां पांच दीपक पांच जगह पर 5 दिशाओं में रखे देखें। जिसे अहिरावण ने मां भवानी की पूजा के लिए जलाया था। ऐसी मान्यता थी कि इन पांचों दीपको को एक साथ बुझाने पर अहिरावण का वध हो जाएगा
 
हनुमान जी ने इसी कारण पंचमुखी रूप धरकर वे पांचों दीपक बुझा दिए और अहिरावण का वध कर श्री राम और लक्ष्मण को कंधों पर बिठाकर लंका की ओर उड़ चलें।
 

पंचमुखी हनुमान के पांच मुख और उनका महत्व

पंचमुखी हनुमान जी का पूर्व की ओर वाला मुख वानर का है जिसकी प्रभा करोडों सूर्य के सामान है। वह विक्राल डाढो वाला है और उसकी व्रिकुटिया चढ़ी हुई है। 
 
दक्षिण की ओर वाला मुख नरसिंह भगवान का है यह अत्यंत उग्र तेज वाला  भयानक है किंतु शरण में आए हुए के भय को दूर करने वाला है। 
 
पश्चिम दिशा वाला मुख गरुड़ का है इसकी चोंच टेढ़ी है। यह सभी नागों के विष, और भूत प्रेत को भगाने वाला है। इससे समस्त रोगों का नाश होता है। 
 
इनका उत्तर की ओर वाला मुख वराह यानी शूकर का है जिसका आकाश के समान कृष्ण वर्ण है। इस मुख के दर्शन से पाताल में रहने वाले जीवो, सिंह व बेताल के भय का और ज्वर का नाश होता है।
 
पंचमुखी हनुमान जी का ऊपर की ओर उठा हुआ मुख हयग्रीव यानी घोड़े का है। यह बहुत भयानक है और असुरों का संहार करनेवाला है इसी मुख के द्वारा हनुमान जी ने तारक नामक महा दैत्य का वध किया था।
 

पंचमुखी हनुमान की पूजा से लाभ

पंचमुखी हनुमान जी में भगवान के 5 अवतारों की शक्ति समाई हुई है इसीलिए वह किसी भी महान कार्य को करने में समर्थ है। 
 
पंचमुखी हनुमान जी की पूजा अर्चना से वाराह, नरसिंहगढ़, गरुड़, हयग्रीव और शंकर जी की उपासना का फल प्राप्त हो जाता है।
 
हनुमान चालीसा का पाठ करने से सभी संकटो का नाश होता है। 
 
आर्थिक तंगी, बीमारी, शत्रुओं का भय आदि परेशानियों से मुक्ति मिलती है। 
 
जैसे गरुड़ जी बैकुंठ में भगवान विष्णु की सेवा में लगे रहते हैं वैसे ही हनुमान जी श्री राम की सेवा में लगे रहते हैं जैसे गरुड़ की पीठ पर भगवान विष्णु बैठते हैं वैसे ही हनुमान जी की पीठ पर श्री राम लक्ष्मण बैठते हैं। गरुड़ जी अपनी मां के लिए स्वर्ग से अमृत लाये थे वैसे ही हनुमान जी लक्ष्मण जी के लिए संजीवनी बूटी लेकर आए।
 
तो ये थी जानकारी की आखिर हनुमान जी ने पंचमुखी अवतार क्यों लिया, इसका क्या कारण था ,इसके पीछे  पौराणिक कथा क्या है, क्यों युद्ध हुआ हनुमान जी का अहिरावण से, पंचमुखी हनुमान के पांचों मुख कैसे थे, उनका महत्व क्या है और पंचमुखी हनुमान जी की पूजा से लाभ। 
 
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